लक्ष्मी पूजन 2025

लक्ष्मी पूजन – परिचय एवं महत्व

देवी लक्ष्मी हिन्दू धर्म में धन, समृद्धि, सुख-शांति की देवी मानी जाती हैं।

दिवाली के मुख्य दिन (अमावस्या तिथि की संध्या) माँ लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है ताकि नव वर्ष में आय-समृद्धि बनी रहे।

इस दिन लोग अपने घरों को स्वच्छ करते हैं, दीप जलाते हैं, एवं अत्यंत श्रद्धा से पूजा करते हैं।

पूजा करते समय यह विश्वास है कि मां लक्ष्मी आकर उन घरों में निवास करती हैं जहां साफ़-सफाई, भक्ति और संतुलन हो।





लक्ष्मी पूजन कब होगा — 2025 में तिथि एवं मुहूर्त

विभिन्न स्रोतों के अनुसार 2025 में लक्ष्मी पूजा 20 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, जो दिवाली का मुख्य दिन है। 
कुछ स्रोतों में 6 अक्टूबर की तिथि भी दिखी है, लेकिन वह संभवतः श्राद पूर्णिमा (कोजागरी लक्ष्मी पूजन) से संबंधित हो सकती है। 

मुख्य मुहूर्त (शुभ समय) के बारे में जानकारी:

Book My Pooja Online के अनुसार, 2025 में अमावस्या तिथि की संध्या में पूजा का मुहूर्त 6:59 बजे शाम से 8:32 बजे शाम (IST) है। 

DrikPanchang कहता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा का समय प्रातःकाल या संध्या में प्रादोष काल (विशेष समय) में करना शुभ है। 

यह भी ध्यान दें: स्थानीय पंचांग (आपके शहर) के अनुसार समय थोड़ा अलग हो सकता है — इसलिए शहर वार मुहूर्त देख लेना चाहिए।


> नोट: यदि आप दिल्ली या अपने शहर का मुहूर्त चाहें, तो मैं तुरंत निकाल सकता हूँ।





पूजा सामग्री (पूजा सामग्री की पूरी सूची)

पूजा की सामग्री सूची इस प्रकार है — शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार:

श्रेणी सामग्री

मूर्ति / चित्र माँ लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर, गणेश जी की मूर्ति/तस्वीर
आसन व मंच चौकी या छोटी मेज़, लाल वस्त्र, सफेद वस्त्र
जल व पवित्रता गंगाजल / पवित्र जल, कलश, जल पात्र
अक्षत / अनाज / धान अक्षत (चावल), पूरे चावल, अनाज (गेहूँ आदि)
फल / मिठाई फल (केला, सेब, अनार, श्रीफल आदि), मिठाई (लड्डू, खीर, हलवा)
फूल / सुगंध गुलाब, कमल, अन्य पुष्प, चंदन, केवड़ा, अगरबत्ती, धूप
तिलक / रंग रोली, कुंकुम, हल्दी, चूना
नारियल / पान / सुपारी नारियल, पान के पत्ते, सुपारी
दीप / प्रकाश दीये, घी, तेल, मिट्टी के दीपक
अन्य सामग्री सप्तपर्ण या पंच पल्लव, हवन सामग्री यदि करना हो, धूप-दीप कत्था, कलावा, मिठाई, आभूषण, रजत / चांदी सिक्के, बही-खाता / व्यवसाय लेज़र (यदि पूजा व्यापार से सम्बन्धित हो), कलम-दिवात आदि


कुछ विशेष बातें:

फूल में कमल और गुलाब को विशेष प्रिय माना गया है। 

अनाज के रूप में चावल और अन्य अनाज को चढ़ावा देना अच्छा माना जाता है। 

घर के पूजा स्थल को गाय के गोबर, चावल या हल्दी-चूने से सजाना शुभ माना जाता है। 

दीपक (दीया) घी या तेल में जलाएं — प्रकाश बहुत महत्वपूर्ण है। 




पूजा विधि / चरणबद्ध तरीके से

नीचे एक विस्तृत विधि दी गई है, जिसे आप अनुसरण कर सकते हैं:

1. तैयारी और पवित्रता

1. स्वच्छता: पूजन से पहले पूरे घर की सफाई करें। विशेष रूप से पूजा स्थान को गंगाजल या पवित्र जल से छिड़कें।


2. पवित्रिकरण: पूजा स्थल पर अक्षत, जल आदि से “ॐ पवित्रः अपवित्रो वा …” मंत्र बोलकर पवित्र करें। 


3. आसन / चौकी स्थापना: एक छोटी मेज़ या चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। ऊपर लक्ष्मी एवं गणेश की प्रतिमा रखें।


4. कलश स्थापना: कलश में जल भरकर, उस पर नारियल रखें एवं उसे लाल वस्त्र में लपेटें। यह वरुण प्रतीक कहलाता है।


5. नवग्रह व षोडश मातृका संकल्प (यदि विधि में हो): नौ ग्रहों और सोलह माताओं की छोटी-छोटी पूजा के लिए चावल की ढेरियां बनाना। 


6. स्वस्तिवाचन: “ॐ स्वस्ति स्वस्ति …” मंत्र आदि उच्चारण करें। 



2. ध्यान और मंत्र उच्चारण

पूजा प्रारंभ करते समय ध्यान करें – मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए “ध्यानम्” (ध्यान मंत्र) पढ़ें। 

ध्यान के पश्चात् मंत्रोच्चारण: लक्ष्मी मंत्र, गणेश मंत्र, कुबेर स्तोत्र आदि। 


3. पूजा अर्चना (Offering / Aradhana)

1. अभिषेक / आचमन: मूर्ति पर पवित्र जल, दूध, दही, घी, शहद आदि चढ़ाएं।


2. तुलसी / पुष्प अर्पण: पुष्प (कमल, गुलाब आदि) अर्पित करें।


3. खंड, सुपारी, नारियल: इन द्रव्यों को अर्पित करें।


4. फूल, धूप, अगरबत्ती: दीप, धूप-अगरबत्ती से पूजा को सुगंधित बनाएं।


5. रोटी, मिठाई, फल: भोग लगाएं।


6. दीपाराधना: हाथ में दीया लेकर देवी को अर्घ्य दें एवं आरती करें।


7. प्रसाद वितरण: पूजा समाप्ति पर परिवार और परिजनों में प्रसाद बाटे।



4. समापन और मंत्र

अंत में “शुभम करोति कल्याणम् …” जैसे समापन मंत्र कहें।

माता से क्षमा प्रार्थना करें यदि अनजाने में कोई दोष हुआ हो।

पूजा स्थली तथा पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक न्योछावर करें।

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